What is Wetland? Ramsar convention, and which India’s wetlands included as Ramsar Sites?

रामसर कन्वेंशन के अनुसार “दलदल पंक भूमि, पीट भूमि या जल कृत्रिम या प्राकृतिक, स्थाई या अस्थाई जल, गतिमान जल, खारा या ताजा या नमीयुक्त जल क्षेत्रों को आद्र भूमि कहा जाता है।”

आद्र भूमियों को धरातल के उन क्षेत्रों के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जो स्थाई एवं अस्थाई रूप से पानी में डूबे हुए या जलमग्न हो। यह तर भूमियां धरातल पर अत्यधिक उत्पादक परिस्थितिकी तंत्र है।

आद्र भूमियों का महत्व

मानव के लिए स्वच्छ जल।

पानी के बहाव को नियंत्रित करना

बाढ़ नियंत्रण

मछली एवं भोज्य पदार्थों के उत्पादक

वनस्पति जीव एवं सूक्ष्म जीव जंतु के आश्रय स्थल

मृदा के लिए जल अवशोशक

मनोरंजन क्रीडा स्थल एवं पर्यटक स्थल

प्रदूषण को कम करना

तलछट की गंदगी को कम करना

अपशिष्ट जल उपचार

रामसर कन्वेंशन आदर भूमियों के संरक्षण के लिए 2 फरवरी 1971 को ईरान के रामसर शहर में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन हुआ इसे ही रामसर समझौता कहा जाता है।

वर्तमान में 169देशों ने इस संधि पर हस्ताक्षर किए हुए हैं यह समझौता 1975 से ही लागू है तथा भारत 1982 में इसमें शामिल हुआ

इसी के उपलक्ष पर विश्व आर्द्रभूमि दिवस 1997 से प्रतिवर्ष 2 फरवरी को मनाया जाता है।

भारत में कुल आद्र भूमि क्षेत्रफल भारत के भौगोलिक क्षेत्रफल का 4.63% है अब तक भारत के 42 क्षत्रों को रामसर समझौते के अंतर्गत आद्र भूमि क्षेत्र घोषित किया हुआ है।

केरल– 1आस्था मुड़ी आर्द्रभूमि इसमें से राष्ट्रीय राजमार्ग 3 गुजरता है।

2 वैंबनाड़ कोल वेटलैंड- 3 जिलों में फैला है 2nd बड़ी रामसर साइट & भारत की लंबी झील।

3 सस्तमकोट्टा झील

तमिल नाडु- प्वाइंट कैलिमेरे वाइल्डलाइफ एंड वर्ल्ड सेंचुरी – मैंग्रूव और ड्राई सदाबहार वन

आंध्र प्रदेश- कोलेरू झील- गोदावरी और कृष्णा नदी के बीच।

उड़ीसा- चिल्का झील- भारत की सबसे बड़ी तटीय लैगून झील।

नालबाना पक्षी अरण्य का मुख्य हिस्सा

भारत में ज्ञात इरावती डॉल्फिन प्रजाति का एकमात्र घर

.. भितरकनिका आर्द्रभूमि & गहिरमाथा मेरिन वन्यजीव अभयारण्य बीडब्ल्यूएस से सटा हुआ खारे पानी का मगरमच्छ ओलिव रिडले

महाराष्ट्र- नंदूर मद्महेश्वर गोदावरी और मधुबन नदी के संगम पर..

लोनार झील

मध्य प्रदेश- भोज आर्द्रभूमि

गुजरात- नालसरोवर बर्ड सेंचुरी भारतीय जंगली गधे की लाइफ लाइन।

वेस्ट बंगाल- ईस्ट कोलकाता वेटलैंड्स कोलकाता शहर के लिए बहुत उपयोगी।

सुंदरबन वेटलैंड- लार्जेस्ट रामसर साइट इन इंडिया।

What is persistent organic pollutants?(POPs)

Environment pollution

Persistent organic pollutants:- sometimes known as “forever chemicals” are organic compounds  that are resistant to environmental degradation  through chemical , biological , and photolytic processes.

 Because of their persistence, POPs bioaccumulate  with potential adverse impacts on human and the environmen health.

Characterstics of POPs:-

– stay in the environment for a long time

– Effects and Expansion More

Stockholm Agreement:- Lists all these POPs.

A Global Agreement.

Its main objective is to protect human and environment from POP.

This agreement was brought in 2001 and came into force from 2004.

India retified from 2006.

The Dirty Dozen:- 12 of the deadliest POPs, named “The Dirty Dozen” by the delegates.

These POPs have been grouped into three categories:

1. pesticides:- aldrin, DDT, chlordane, dieldrin, endrin, heptachlor, mirex and toxaphene.

2. industrial chemical:- POPs such as hexachlorobenzene (HCB) and polychlorinated biphenyls (PCBs) and

3. finally, POPs:- such as dioxins and furans – the by-products and contaminants produced in waste disposal processes.

स्थायी कार्बनिक प्रदूषक(POPs):- कभी-कभी “हमेशा के लिए रसायन” के रूप में जाना जाता है, ऐसे कार्बनिक यौगिक होते हैं जो रासायनिक, जैविक और फोटोलिटिक प्रक्रियाओं के माध्यम से पर्यावरण क्षरण के प्रतिरोधी होते हैं।

उनकी दृढ़ता के कारण, पीओपी मानव और पर्यावरण स्वास्थ्य पर संभावित प्रतिकूल प्रभावों के साथ जैवसंचित होते हैं

Characterstics of POPs:-

– पर्यावरण में बहुत देर तक रहते

– प्रभाव और विस्तार अधिक

स्टॉकहोम समझौता :- इन सभी पीओपी को लिस्ट करता है।

एक ग्लोबल समझौता।

इसका मुख्य उद्देश्य मानव और पर्यावरण को सुरक्षित करना है पीओपी से।

यह समझौता 2001 में लाया और 2004 से लागू हुआ

भारत ने 2006 से retify किया।

द डर्टी डोजेन: – सबसे घातक पीओपी में से 12, POPs को “द डर्टी डोजेन” नाम दिया गया।

इन पीओपी को तीन श्रेणियों में बांटा गया है:-

1. कीटनाशक:- एल्ड्रिन, डीडीटी, क्लोर्डेन, डाइलड्रिन, एंड्रिन, हेप्टाक्लोर, मायरेक्स और टोक्साफीन।

2. औद्योगिक रसायन:- पीओपी जैसे हेक्साक्लोरोबेंजीन (एचसीबी) और पॉलीक्लोराइनेटेड बाइफिनाइल (पीसीबी) और

3. अंत में, पीओपी:- जैसे डाइऑक्सिन और फ्यूरान – अपशिष्ट निपटान प्रक्रियाओं में उत्पादित उप-उत्पाद और संदूषक।

What is unemployment? Types of unemployment in india?

Unemployment

Unemployment:- Poverty and unemployment remain the most prominent problems in our country at present.  These problems were present even before the independence of India and when India became independent, these problems are present in our society even after that. Although the government has run many schemes to deal with these problems, but at the ground level still these problems are present in our society.  weakening the country.

Now let us talk about the problem of unemployment because it is a very serious matter for a developing country like India.  In the present time, after the arrival of the epidemic like Kovid, this problem has taken a more formidable form.  Ever since the pandemic broke out, many people have been stripped of their jobs, which has had a greater impact on the people belonging to the lower income group and also on the workers who had left their state in search of employment in another state.

Definition of unemployment:-

Unemployment is said to exist when people willing to work at the prevailing wage rate cannot find employment.

The labor force population includes those people whose age is between 15 and 59 years.

There are two types of unemployment present in the context of India:-

Rural unemployment:– There is seasonal and disguised unemployment in rural areas.

urban areas:- there is mostly educated unemployment.

1. Seasonal unemployment:- When people are not able to get employment in some months of the year.  People dependent on agriculture usually face such problems.

2. Disguised unemployment:- Under this people appear to be employed.  This happens mainly in the families engaged in agricultural work.  5 people are needed in a work but 8 people are engaged in it, out of which three people are extra, even if those 3 people are removed, there will be no decrease in the productivity of the farm and the marginal productivity is zero.

3. Educated unemployment:- Many youths holding matriculation, graduate and postgraduate degrees are unable to get employment.  Unemployment among graduate and post graduate youth is increasing faster than in matriculation.

Problems of unemployment: –

Unemployment is a curse and a dangerous problem for any country because in this situation people do not have enough capacity to meet their normal needs, this usually leads to the problem of poverty.  Unemployment creates many problems for any country and thereby creates obstacles in the development of that country, which is very important to solve.  The following problems arise due to unemployment:-

Hunger problem

1. Unemployment leads to wastage of manpower resource.

2. A sense of hopelessness and despondency is created in the youth.

3. There is not enough money to maintain the family.

4. Unemployment increases the economic burden.

5. The dependence of unemployment on the working population increases.

6. There is a general decline in health status.

7. Increases isolation from the school system.

8. Unemployment has an adverse effect on the overall development of the economy.

Conclusion:- The increase in unemployment is an indicator of a slowing economy.  It also wastes resources that could have been usefully employed.  If people could not be used as a resource then naturally they would become a liability for the economy.

वर्तमान में गरीबी और बेरोजगारी हमारे देश में सबसे प्रमुख समस्याएं बनी हुई है। यह समस्याएं भारत की स्वतंत्रता से पहले भी विद्यमान थी और जब भारत स्वतंत्र हुआ तो उसके पश्चात भी यह समस्याएं हमारे समाज में विद्यमान है ।हालांकि सरकार ने इन समस्याओं से निपटने के लिए अनेको योजनाएं चला रखी है परंतु जमीनी स्तर पर अभी भी यह समस्याएं हमारे देश को कमजोर कर रही है।

अब हम बात करते हैं बेरोजगारी की समस्या पर क्योंकि भारत जैसे विकासशील देश के लिए बहुत ही गंभीर का विषय है। वर्तमान समय में कोविड जैसी महामारी के आने के पश्चात इस समस्या ने और भी विकराल रूप धारण कर लिया है। जब से महामारी फैली है तब से अनेकों लोगों से उनके रोजगार छीन गए है जिसका असर निम्न आय वर्ग के लोगों पर अधिक पडा है और उन श्रमिकों पर भी अधिक पड़ा है जो अपने राज्य को छोड़कर किसी दूसरे राज्य में रोजगार की तलाश में आए थे।

बेरोजगारी की परिभाषा:-

बेरोजगारी उस समय विद्यमान कही जाती है जब प्रचलित मजदूरी की दर पर काम करने के लिए इच्छुक लोग रोजगार नहीं पा सकते।

श्रम बल जनसंख्या में वे लोग शामिल किए जाते हैं जिनकी उम्र 15 से 59 वर्ष के बीच हो।

भारत के संदर्भ में दो तरह की बेरोजगारी उपस्थित है:-

ग्रामीण बेरोजगारी:- ग्रामीण क्षेत्रों में मौसमी और प्रच्छन्न बेरोजगारी है।

नगरीय क्षेत्र:- में अधिकांशत शिक्षित बेरोजगारी है।

1. मौसमी बेरोजगारी:- जब लोग वर्ष के कुछ महीनों में रोजगार प्राप्त नहीं कर पाते है। कृषि पर आश्रित लोग आमतौर पर इस तरह की समस्याओं से जूझते हैं।

2. प्रच्छन्न बेरोजगारी:- इसके अंतर्गत लोग नियोजित प्रतीत होते हैं। ऐसा मुख्यता कृषिगत काम में लगे परिजनों में होता है। किसी काम में 5 लोगों की आवश्यकता है लेकिन इसमें 8 लोग लगे होते हैं उनमें तीन लोग अतिरिक्त हैं अगर उन 3 लोगों को निकाल भी दिया जाए तो खेत की उत्पादकता में कोई कमी नहीं आएगी और सीमांत उत्पादकता शून्य होती है।

3. शिक्षित बेरोजगारी:- मैट्रिक, graduate और स्नातकोत्तर डिग्री धारक अनेक युवक रोजगार पाने में असमर्थ है। मैट्रिक की तुलना में स्नातक और स्नातकोत्तर युवकों में बेरोजगारी अधिक तेजी से बढ़ रही है।

बेरोजगारी की समस्याएं:- बेरोजगारी किसी भी देश के लिए अभिशाप और खतरनाक समस्या है क्योंकि इस स्थिति में लोगों के पास इतनी क्षमता नहीं होती कि वह अपनी सामान्य जरूरतों को भी पूरा कर पाते इससे गरीबी की समस्या अमूमन पैदा हो जाती है। बेरोजगारी से किसी भी देश के लिए अनेकों समस्याएं उत्पन्न हो जाती है और जिससे उस देश के विकास में रुकावटे पैदा हो जाती है जिनका समाधान करना अति आवश्यक है। बेरोजगारी के कारण निम्नलिखित समस्याएं उत्पन्न होती है:-

1. बेरोजगारी से जन शक्ति संसाधन की बर्बादी होती है।

2. युवकों में निराशा और हताशा की भावना पैदा होती है।

3. परिवार का भरण पोषण करने के लिए प्रयाप्त मुद्रा नहीं होती।

4. बेरोजगारी से आर्थिक बोझ में वृद्धि होती है।

5. कार्यरत जनसंख्या पर बेरोजगारी की निर्भरता बढ़ती है।

6. स्वास्थ्य स्तर में एक आम गिरावट आती है।

7. स्कूल प्रणाली से अलगाव में वृद्धि होती है।

8. अर्थव्यवस्था के समग्र विकास पर बेरोजगारी का दुष्प्रभाव पड़ता है।

निष्कर्ष:- बेरोजगारी में वृद्धि मंदीग्रस्त अर्थव्यवस्था का सूचक है। यह संसाधनों की बर्बादी भी करता है जिन्हें उपयोगी ढंग से नियोजित किया जा सकता था। अगर लोगों को संसाधन के रूप में प्रयोग नहीं किया जा सका तो स्वाभाविक रूप से अर्थव्यवस्था के लिए दायित्व बन जाएंगे।

Emergency power of the Indian president and Emergency provision?

Emergency power of the Indian president:-

In the ‘Part 18′ of the Constitution of India, the provisions of emergency provisions from Article 352 to 360 have been described which are used by the President.

Why emergency provision mentioned in Indian constitution :-

It has been mentioned in the Indian Constitution to enable the Center to fight effectively against any abnormal situation. The main objective of these provisions is to safeguard the sovereignty, unity and integrity of the country and the Constitution.

At the time of emergency, all the powers rest with the center and the states are under the complete control of the center, thus turning the Indian federal structure into a unitary structure.

Three types of emergency have been described in the constitution:-

Article 352: – Declaration of national emergency due to war, aggression and armed rebellion.

Article 356: President’s rule due to failure of constitutional machinery in the state.

Article 360:- Financial emergency.

Let us now describe in detail these three emergency powers of the President mentioned in the Constitution.

1. Article 352:- National Emergency

Cause of war, invasion and armed rebellion (word of armed rebellion added in the 44th Constitutional Amendment in 1978)

In the constitution, the declaration of emergency, the use of the sentence

War and External Aggression – External Emergency

Armed rebellion – internal emergency

Only on the written recommendation of the Cabinet

44 Amendment 1978 Judicial review will be done Minerva case 1980 Proclamation challenged in court

Parliamentary approval and time period:-

Approval by both the houses within 1 month of issue of proclamation

(44 amendments done in first 2 months 1978 to 1 month)

Emergency can be extended indefinitely for 6 months with the approval of Parliament every 6 months.

(This provision also 44th amendment of 1978)

Every motion for making and continuing the declaration must be passed by a special majority of both the houses (this provision also 40 Amendment 1978)

Expiration of declaration does not require parliamentary approval at any time

Effects of National Emergency:-

State Governments under the control of the Center but cannot be suspended

Instructions to the Central State Government on any subject

Parliament has the power to make laws on the state list, this law will remain in force for 6 months after the end of the emergency.

The President can also issue an ordinance on the subject of the State List.

Deficiencies in money for the state can also be eliminated.

The term of Lok Sabha will be extended by one year at a time, it can be done till eternity.

* The end of the emergency will only last for 6 months, the same provision is applicable to the state assembly as well.

2. Article 356:- President’s rule

Basis of declaration:-

1. Article 355:- Duty of the Center Every state government should act according to the arrangement of the constitution, under this, if the constitutional machinery in the state fails, the state government can be subordinated to it and there the President’s rule, state emergency and constitutional emergency.

2. Article 365 A state does not follow the instructions of the center even then.

Parliamentary approval and time period:-

Approval of both the Houses within 2 months of issue of declaration

Emergency can be extended up to 6 months up to a maximum of 3 years

Declaration resolution is passed by either house with a simple majority

Such a declaration can be withdrawn at any time without the permission of the Parliament.

Effects of President’s Rule:-

President enjoys extraordinary powers

State executive dismissed or suspended or dissolved

Administration of the State through the Governor

Legislature Powers of the State Executive to the Center

3. Article 360:- Financial Emergency

Financial Declaration The financial position of India or any territory thereof is at risk

It is mandatory to take the approval of the declaration from the Parliament within 2 months.

can be imposed indefinitely

resolution passed by simple majority

The President can withdraw the declaration at any time.

Central control over all financial matters of the state

Emergency power of the Indian president:-

भारतीय संविधान के भाग 18 में अनुच्छेद 352 से 360 तक आपातकालीन प्रावधान प्रावधानों का वर्णन किया गया है जिसका उपयोग राष्ट्रपति द्वारा किया किया जाता है

Why emergency provision mentioned in indian constitution :-

इसका उल्लेख भारतीय संविधान में किया गया है ताकि केंद्र को किसी भी असामान्य स्थिति से प्रभावी रूप से लड़ने में सक्षम बनाया जा सके इन प्रावधानों का मुख्य उद्देश्य देश की संप्रभुता एकता और अखंडता तथा संविधान की सुरक्षा करना है।

आपातकाल के समय सभी शक्तियां केंद्र के पास आ जाती है और राज्य केंद्र के पूर्ण नियंत्रण में रहते हैं इस प्रकार भारतीय संघीय ढांचा एकात्मक ढांचे में बदल जाता है।

संविधान में तीन प्रकार के आपातकाल का वर्णन:-

अनुच्छेद 352:- युद्ध बहाए आक्रमण और सशस्त्र विद्रोह के कारण राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा।

अनुच्छेद 356:- राज्य में संवैधानिक तंत्र विफल होने के कारण राष्ट्रपति शासन।

अनुच्छेद 360:- वित्तीय आपातकाल।

आइए अब हम संविधान में वर्णित राष्ट्रपति की इन तीन आपातकाल शक्तियों का वर्णन विस्तार पूर्वक करते हैं।

1. अनुच्छेद 352:- राष्ट्रीय आपातकाल

युद्ध बहाए आक्रमण और सशस्त्र विद्रोह के कारण (सशस्त्र विद्रोह शब्द 44संविधान संशोधन 1978 में जोड़ा)

संविधान में आपातकाल की घोषणा वाक्य का प्रयोग

युद्ध एवं बाह्य आक्रमण- बाह्य आपातकाल

सशस्त्र विद्रोह – आंतरिक आपातकाल

केवल मंत्रिमंडल की लिखित सिफारिश पर

44 संशोधन 1978 न्यायिक समीक्षा होगी मिनेरवा मामला 1980 उद्घोषणा को अदालत में चुनौती

संसदीय अनुमोदन और समय अवधि:- उद्घोषणा जारी के 1 महीने के अंदर दोनों सदनों द्वारा अनुमोदन

(पहले 2 महीने में 44 संशोधन 1978 1 महीनना किया)

आपातकाल 6 महीने तक प्रत्येक 6 मंथ में संसद से अनुमोदन लेकर अनंत काल तक बढ़ा सकते हैं

(यह प्रावधान भी 44व संशोधन 1978 का)

घोषणा करने तथा जारी रखने का प्रत्येक प्रस्ताव दोनों सदनों से विशेष बहुमत से पारित होना चाहिए (यह प्रावधान भी 40 संशोधन 1978)

घोषणा की समाप्ति किसी भी समय संसदीय अनुमोदित की जरूरत नहीं

राष्ट्रीय आपातकाल के प्रभाव:-

राज्य सरकारें केंद्र के नियंत्रण में परंतु निलंबित नहीं कर सकते

केंद्र राज्य सरकार को किसी भी विषय पर निर्देश

संसद को राज्य सूची पर कानून बनाने का अधिकार यह कानून आपातकाल की समाप्ति पर 6 महीने तक लागू रहेगा।

राष्ट्रपति राज्य सूची विषय पर अध्यादेश भी जारी कर सकता।

राज्य हेतू धन में कमियां समाप्ति भी कर सकते।

लोकसभा का कार्यकाल एक समय में 1 वर्ष बढ़ाया जाएगा ऐसा अनंत काल तक कर सकते हैं

*आपातकाल की समाप्ति ओनली 6 मंथ तक कार्यकाल रहेगा यही प्रावधान राज्य विधानसभा पर भी लागू

2. अनुच्छेद 356:- राष्ट्रपति शासन

उद्घोषणा का आधार:-

1. अनुच्छेद 355:- केंद्र का कर्तव्य प्रत्येक राज्य सरकार संविधान की व्यवस्था के अनुरूप कार्य करें इसके तहत राज्य में संविधान तंत्र विफल हो जाने पर राज्य सरकार को अपने अधीन कर सकते हैं और वहां पर राष्ट्रपति शासन राज्य आपात और संवैधानिक आपातकाल।

2. अनुच्छेद 365 कोई राज्य केंद्र के निर्देशों का पालन ना करें तब भी।

संसदीय अनुमोदन और समय अवधि:-

घोषणा जारी करने के 2 महीने के भीतर दोनों सदनों का अनुमोदन

आपातकाल 6 महीने तक अधिकतम 3 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता

घोषणा का प्रस्ताव किसी भी सदन द्वारा सामान्य बहुमत से पारित हो

ऐसी घोषणा किसी भी समय वापस ली जा सकती है संसद की अनुमति जरूरी नहीं

राष्ट्रपति शासन के प्रभाव:-

राष्ट्रपति को असाधारण शक्तियां प्राप्त होती है

राज्य कार्यपालिका बर्खास्त या निलंबित या विघटन

राज्य का प्रशासन राज्यपाल के माध्यम से

राज्य की कार्यकारी की विधायिका शक्तियां केंद्र को

3. अनुच्छेद 360:- वितीय आपातकाल

वित्तीय घोषणा भारत या उसके किसी क्षेत्र की वित्तीय स्थिति खतरे में हो

घोषणा की स्वीकृति संसद से 2 महीने के भीतर लेना अनिवार्य

अनिश्चित काल के लिए लगा सकते हैं

प्रस्ताव सामान्य बहुमत से पारित हो

घोषणा को राष्ट्रपति किसी भी समय वापस ले सकता

राज्य के सभी वित्तीय मामलों पर केंद्र का नियंत्रण

Definition of president? Election and eligiblelty criteria & power and function of president in india?

Article 52 to 78 of Part 5 of the Constitution of India describes the executive of the Union.

The executive of the union comes under:-

– President

– Vice President

– Prime minister

– cabinet

– Attorney General

Article 54 Election of the President:-

The President is not elected directly by the people but by the members of the electoral college, which includes only:-

– Elected members of both the houses of parliament

– Elected members of the State Legislative Assembly

– Elected members of the Delhi and Puducherry Legislative Assemblies

When an assembly is dissolved, its members cannot vote in the election of the President.

The President is elected by proportional representation by means of single transferable vote and secret ballot.

*Candidate must get a certain share of votes to win.

* All disputes related to the presidential election are investigated by the Supreme Court’s jurisdiction and its decision is final.

*This election cannot be challenged if the electoral college is incomplete that the office of a member was vacant.

*If the appointment is declared invalid, the work done by him will continue to be effective.

Article 58 Qualifications for the office of President:-

– citizen of India

– Age 35 years

Must be qualified to be elected as a member of the Lok Sabha

– do not hold any office of profit

– Nomination requires 50 proposers and 50 seconders. Security deposit is ₹ 15000 with RBI

If unable to obtain 1/6th of the votes, the amount is forfeited

Article 60 – Oath :- The oath is administered by the Chief Justice or Senior Judge of the Supreme Court.

Article 56- Tenure:-

– 5 years

– Resignation to the Vice President

* If there is no successor, the President can continue in office even after 5 years.

* may be re-elected

Article 61 Impeachment of the President :- (Procedure taken from the Constitution of USA)

Impeachment process for ‘violating the constitution’ but this sentence has not been defined in the constitution.

Impeachment begins in either House of Parliament.

– Signing of the charges by 1/4th of the members of the House.

The President will have to give 14 days notice

– This resolution will have to be passed by both the houses separately with a two-thirds majority.

Impeachment is a quasi judicial process of Parliament.

*Provided that the elected members of the State and Union Territory Legislative Assemblies do not participate.

*It is attended by nominated members of both the houses of Parliament.

No President has been impeached in India so far.

Powers and Duties of President :-

Executive Powers:-

All Governance related work of Government of India

Appointment of Prime Minister and other Ministers

Attorney General, CAG, Chief Election Commissioner & Election Commissioners, Chairman & Members of UPSC, Governor, Appointment of Chairman and members of Finance Commission

Appointment of Commission for SC, ST, OBC

Appointment of Inter-State Council for Center-State Cooperation

Legislative Powers:-

dissolution of the Lok Sabha

Article 108-Summoning of Joint Session (Presiding by Speaker or Deputy Speaker of Lok Sabha or Deputy Chairman of Rajya Sabha)

to address parliament

12 members nominated to Rajya Sabha

Nominated in two Anglo-Indian Lok Sabha

Decision on the Question of Qualification of a Member of Parliament

Financial Powers:-

Prior permission for money bill (under Article 110)

Laying the budget before the Parliament (under Article 112)

Recommendation for Demand for Grants

Constitution of Finance Commission (under Article 280)

Judicial Powers:-

Appointment of CGI and other judges of the Supreme Court, Judges of the High Court

Article 72 – Pardoning power

Article 143 – Taking advice from the Supreme Court

Emergency Powers:-

Article 352 – National Emergency

Article 356 – President’s rule

Article 360 – Financial emergency

Other Powers of the President

Article 123 Ordinance power to the President

It is clear from this that the office of the President is constitutionally very important because all the executive functions of the country are done in the name of the President.

But the President is still a nominal executive chairman while the prime minister is the actual executive chairman.

भारत के संविधान के भाग 5 के अनुच्छेद 52 से 78 तक संघ की कार्यपालिका का वर्णन।

संघ की कार्यपालिका के अंतर्गत आते हैं:-

– राष्ट्रपति

– उपराष्ट्रपति

– प्रधानमंत्री

– मंत्रीमंडल

– महान्यायवादी

अनुच्छेद 54 राष्ट्रपति का निर्वाचन:-

राष्ट्रपति का निर्वाचन जनता प्रत्यक्ष रूप से नहीं करती बल्कि निर्वाचक मंडल के सदस्यों द्वारा किया जाता है जिसमें शामिल होते हैं केवल:-

– संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य

– राज्य विधानसभा के निर्वाचित सदस्य

– दिल्ली और पुडुचेरी विधानसभा के निर्वाचित सदस्य

* जब कोई सभा विघटित हो गई हो तो उसके सदस्य राष्ट्रपति के निर्वाचन में मतदान नहीं कर सकते।

* राष्ट्रपति का चुनाव अनुपातिक प्रतिनिधित्व के अनुसार एकल संक्रमणीय मत और गुप्त मतदान द्वारा होता है।

*प्रत्याशी को जीतने के लिए मतों का एक निश्चित भाग प्राप्त करना आवश्यक है।

* राष्ट्रपति चुनाव से संबंधित सभी विवादों की जांच हुआ फैसले उच्चतम न्यायालय की अधिकारिता में आते हैं और उसका फैसला अंतिम होता है।

*इस चुनाव को चुनौती नहीं दी जा सकती कि निर्वाचक मंडल अपूर्ण है की किसी सदस्य का पद रिक्त था।

*नियुक्ति को अवैध घोषित किया जाए तो उसके द्वारा किए गए कार्य प्रभावी बने रहेंगे।

अनुच्छेद 58 राष्ट्रपति के पद हेतु योग्यताएं:-

– भारत का नागरिक

– आयु 35 वर्ष

– लोकसभा का सदस्य निर्वाचित होने की योग्यता हो

-किसी लाभ के पद पर ना हो

नामांकन हेतु 50 प्रस्तावक व 50 अनुमोदक चाहिए जमानत राशि RBI के पास ₹15000

– मतों का 1/6 भाग प्राप्त करने में असमर्थ हो तो राशि जब्त हो जाती है

अनुच्छेद 60 – शपथ :- उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश या वरिष्ठ न्यायाधीश द्वारा शपथ दिलाई जाती

अनुच्छेद 56- कार्यकाल:- 5 वर्ष

– त्यागपत्र उपराष्ट्रपति को

* उत्तराधिकारी ना हो तो राष्ट्रपति 5 वर्ष के पश्चात भी पद पर बना रह सकता है

* पुनः निर्वाचित हो सकता है

अनुच्छेद 61 राष्ट्रपति पर महाभियोग :- (प्रक्रिया यूएसए के संविधान से ली)

‘संविधान का उल्लंघन’ करने पर महाभियोग प्रक्रिया परंतु संविधान में इस वाक्य को परिभाषित नहीं किया है।

– महाभियोग संसद के किसी भी सदन में प्रारंभ।

– सदन की 1/4 सदस्यों द्वारा आरोपों पर हस्ताक्षर।

– राष्ट्रपति को 14 दिन का नोटिस देना होगा

– इस प्रस्ताव को दो तिहाई बहुमत से दोनों सदनों से पारित कराना होगा अलग-अलग।

महाभियोग संसद की एक अर्ध न्यायिक प्रक्रिया है।

*परंतु राज्य और केंद्र शासित विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य भाग नहीं लेते।

*इसमें संसद के दोनों सदनों के नामांकित सदस्य भाग लेते हैं

*भारत में अभी तक किसी राष्ट्रपति पर महाभियोग नहीं लगाया।

राष्ट्रपति की शक्तियां व कर्तव्य:-

कार्यकारी शक्तियां:-

भारत सरकार के सभी शासन संबंधी कार्य

प्रधानमंत्री तथा अन्य मंत्रियों की नियुक्ति

महान्यायवाद, CAG, मुख्य चुनाव आयुक्त & चुनाव आयुक्तों, यूपीएससी के अध्यक्ष& सदस्य, राज्यपाल, वित्त आयोग के अध्यक्ष व सदस्यों की नियुक्ति

अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ओबीसी के लिए आयोग की नियुक्ति

अंतर राज्य परिषद की नियुक्ति केंद्र राज्य सहयोग के लिए

विधायी शक्तिया:-

लोकसभा का विघटन

Article 108- संयुक्त अधिवेशन का आह्वान ( अध्यक्षता लोकसभा का अध्यक्ष या उपाध्यक्ष या राज्यसभा का उप सभापति)

संसद को संबोधित करना

12 सदस्य राज्यसभा में मनोनीत

दो आंग्ल भारतीय लोक सभा में मनोनीत

संसद सदस्य की योग्यता के प्रश्न पर निर्णय

वित्तीय शक्तियां:-

धन विधेयक हेतु पूर्व अनुमति (under Article 110)

बजट को संसद के समक्ष रखना (under Article 112)

अनुदान की मांग हेतु सिफारिश

वित्त आयोग का गठन (under Article 280)

न्यायिक शक्तियां:-

सुप्रीम कोर्ट के सीजीआई और अन्य न्यायाधीश, हाईकोर्ट के न्यायधीश की नियुक्ति

अनुच्छेद 143- सुप्रीम कोर्ट से सलाह लेना

अनुच्छेद 72- क्षमादान शक्ति

आपातकालीन शक्तियां:-

अनुच्छेद 352- राष्ट्रीय आपातकाल

अनुच्छेद 356- राष्ट्रपति शासन

अनुच्छेद 360- वित्तीय आपातकाल

राष्ट्रपति की अन्य शक्तियां

अनुच्छेद 123 राष्ट्रपति को अध्यादेश शक्ति

इससे स्पष्ट होता है कि राष्ट्रपति का पद संवैधानिक तौर पर बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि देश के सभी कार्यकारी काम राष्ट्रपति के नाम से किए जाते हैं।

परंतु राष्ट्रपति फिर भी एक नाममात्र कार्यकारी अध्यक्ष हैं जबकि प्रधानमंत्री वास्तविक कार्यकारिणी अध्यक्ष है।

Top 5 Study Tips for students.

Study Tips:-

Study Tips

In ancient times, the student did not have so many facilities as he has today, today he can study or prepare himself through various platforms of study like online / offline classes, but along with the facilities, the inconveniences also keep on going.  Because of which there is a hindrance in the study, in this situation the student does not feel comfortable himself and may sometimes deviate from his path.

How many problems a student / participant has to face in his life but still keeps trying to reach his destination because he has now decided that now he has to achieve his goal even if he wants to  No matter what happens, here are some important study tips that you can use while studying:-

“Don’t stop, just keep walking, don’t run, just keep walking.

The floor will be found by you, just keep walking on your path. “

By Dileep Rana

1. Keeping the mind calm and focused:- Keeping the mind calm and focused is very important in student life because when our mind is calm and concentrated, our attention becomes completely one-sided while studying, otherwise many times while studying our  The mind keeps wandering about things here and there, due to which we are not able to do qualitative studies and due to this our concentration ends while studying.

Don’t go in stress

Don’t go in stress

Keep your mind calm and focused, you can adopt the right habits in your life such as getting up early in the morning, doing yoga, meditating and doing physical activity so that our body remains fit and healthy and our mind is light because whenever you study continuously  If so, then it directly affects our mind, so that our mind becomes a bit cumbersome, then at that time we should concentrate on sports, whenever we go to play, we become completely free from many thoughts and our  The pressure on the brain gradually reduces after that the student can adopt the same routine.

2. Keeping the body healthy and balanced:- We all already know and understand that “A healthy soul and a healthy mind reside in a healthy body.”  Therefore, it is necessary in the life of the student also that our body should be healthy and balanced so that along with it our mind remains vaccinated with concentration on studies.  To keep the body healthy, you can try many ways like getting up early in the morning, doing yoga, jogging and eating a balanced diet as well as if appropriate you can also do exercise, gym etc.

Meditation

3. Determination of proper place and time for studying: – We all know that it is very important to keep the mind calm for studying and it is very important to have a good place and environment to keep the mind calm because noise-  Studying in an atmosphere of alcohol and concentrating in study is a very difficult task, that’s why if possible, when you sit to study, determine the proper place to study, like you can make a separate study room for this, that room should be like this  Where natural scenery is easily visible and pure air keeps going in and the room is illuminated.

Student concentration

It is very important to study in the right place as well as at the right time when you feel that this time is right for you and when you feel comfortable studying in this time then choose such time to study only.  .  It is not necessary for every student to get up early in the morning and the morning time is best for studies, every student has a different nature, that is why decide the time according to your wish and according to your instincts and not by seeing otherwise.  Such a time would be good for you for a day or two, but you cannot follow it for more days because the work done by looking at others does not fit for everyone.

4. Studying continuously:- “The root of the practice of doing exercises is the layer mark on the suzan rasri aavat jaat te sil” we have been hearing this sentence since childhood and if we understand its meaning correctly, then all the troubles will be solved immediately. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . .  Maybe it means that just as a rope kept on a well repeatedly up and down leaves a mark on the stone, similarly a retarded person becomes learned by repeated attempts.

Study continue never give up

Study continue never give up

The secret of success is hidden in this sentence because a student studies but we get the result of that study only when we keep doing that study continuously.  It is not important to study for 18 hours out of 24 hours but it is more fruitful to study little but continuously during the day and every day of course.  Of course, you study only 6 hours a day and you follow this routine every day.

5. Continuous revision of the educated: – The smaller our mind is, the deeper are its secrets.  Scientists from all over the world have been trying to unravel its secrets for decades, yet all the layers of the mind have not been opened.  It is believed that our brain is so capable that even a supercomputer is next to nothing.  Despite this, we humans have not been able to learn to use our brain properly and fully.  Our brain cannot remember many things for a long time, so it is necessary for the student to revise whatever is being studied again and again so that it can stay in our mind for a long time.

Top 5 study tips for students in hindi :-

प्राचीन समय में विद्यार्थी के पास इतनी सुविधाएं उपलब्ध नहीं होती थी जितनी कि आज उसके पास है आज पढ़ाई करने के विविध प्लेटफार्म जैसे ऑनलाइन/ऑफलाइन कक्षाओं के माध्यम से अपना अध्ययन या तैयारी कर सकते है परंतु सुविधाओं के साथ-साथ असुविधाएं भी चलती रहती है जिससे अध्ययन में रुकावट आ जाती है इस स्थिति में विद्यार्थी अपने आप को सहज महसूस नहीं करता है और शायद कई बार अपने पथ से भी भटक जाता है।

एक विद्यार्थी/प्रतिभागी को अपने जीवन में ना जाने कितनी समस्याओं का सामना करना पड़ता है परंतु फिर भी वह अपनी मंजिल पर पहुंचने के लिए लगातार प्रयास करता रहता है क्योंकि उसने अब यह निर्णय कर लिया है कि अब उसे अपना लक्ष्य प्राप्त करना ही है चाहे कुछ भी हो जाए यहां पर कुछ महत्वपूर्ण स्टडी टिप्स दी गई है जिसका प्रयोग आप अध्ययन करते समय कर सकते हैं:-

“तू रुक मत बस तू चलता रह, तू भाग मत बस चलता रह।

मंजिल मिल ही जाएगी तुझे तेरी, बस अपने पथ पर तू चलता रह।”

By Unknown

1. मन को शांत और एकाग्र रखना:- मन का शांत रहना और एकाग्र रहना विद्यार्थी जीवन में बहुत ही महत्वपूर्ण है क्योंकि जब हमारा मन शांत और एकाग्र होता है तो पढ़ते समय हमारा ध्यान बिल्कुल एक तरफा हो जाता है अन्यथा कई बार पढते समय हमारा मन इधर-उधर की चीजों में भटकता रहता है जिस कारण हम गुणात्मक अध्ययन नहीं कर पाते और इससे हमारी अध्ययन करते समय एकाग्रता समाप्त हो जाती है।

मन को शांत और एकाग्र आप अपने जीवन में सही आदतों को अपना सकते है जैसे सुबह जल्दी उठना, योगा करना, ध्यान लगाना और फिजिकल एक्टिविटी करना जिससे हमारा शरीर चुस्त और स्वस्थ भी रहे और हमारा मन हल्का रहे है क्योंकि जब भी आप लगातार पढ़ाई करते हैं तो उसका असर सीधा हमारे दिमाग पर पड़ता है कि जिससे कि हमारा दिमाग थोड़ा बहुत बोझिल सा हो जाता है तो उस समय हमें खेलकूद मैं ध्यान लगाना चाहिए जब भी हम खेलने जाते तो हम संपूर्ण रूप से अनेकों विचारों से स्वतंत्र हो जाता है और हमारे दिमाग पर दबाव धीरे-धीरे कम हो जाता है उसके पश्चात विद्यार्थी अपनी उसी रूटीन को अपना सकता है।

2. शरीर को स्वस्थ एवं संतुलित रखना:- हम सब पहले से ही जानते हैं और समझते हैं किस “स्वस्थ शरीर में स्वस्थ आत्मा और स्वस्थ चित का वास होता है।” इसलिए विद्यार्थी के जीवन में भी जरूरी है की हमारा शरीर स्वस्थ और संतुलित रहे ताकि इसके साथ-साथ हमारा दिमाग अध्ययन पर एकाग्रता के साथ टीका रहे। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आप कई तरीके आजमा सकते हैं जैसे सुबह जल्दी उठना, योगा करना, जोगिंग करना और संतुलित आहार खाना और साथ ही उचित हो तो आप व्यायाम, जिम आदि भी कर सकते हैं।

3. पढ़ने के लिए उचित स्थान एवं समय का निर्धारण:- हम सबको पता है कि पढ़ाई करने के लिए मन का शांत रहना बहुत ही जरूरी है और मन को शांत रखने के लिए एक उत्तम स्थान और वातावरण का होना अति आवश्यक है क्योंकि शोर-शराबे के वातावरण में पढ़ाई करना और अध्ययन में ध्यान लगाना बहुत ही कठिन कार्य है इसीलिए हो सके तो जब आप पढ़ाई करने बैठेंगे तो पढ़ने के लिए उचित स्थान का निर्धारण कर ले जैसे इसके लिए आप अलग से स्टडी रूम बना सकते हैं वह रूम ऐसा होना चाहिए जहां प्राकृतिक दृश्य आसानी से दिखाई दे और शुद्ध हवा अंदर आती-जाती रहे और कमरा रोशनी दायक हो।

उचित स्थान के साथ-साथ उचित समय में पढ़ाई करना भी बहुत ही महत्वपूर्ण है जब आपको लगे कि यह समय आपके लिए ठीक है और जब आप इस समय में पढ़ते हैं तो आप सहज महसूस करते हैं तो ऐसे समय को ही पढ़ाई करने के लिए चुने। जरूरी नहीं कि हर विद्यार्थी के लिए सुबह जल्दी उठना और सुबह का समय पढ़ाई के लिए उत्तम ही हो हर विद्यार्थी का अलग-अलग स्वभाव होता है इसीलिए समय का निर्धारण अपनी इच्छा अनुसार और अपनी सहजता के अनुसार ही करें ना कि देखा देखी मे करें अन्यथा ऐसा समय एक-दो दिन के लिए तो आपके लिए अच्छा रहेगा परंतु ज्यादा दिन के लिए आप इसे फॉलो नहीं कर सकते क्योंकि दूसरों को देखकर किया गया काम हर किसी के लिए उचित नहीं बैठता।

4. लगातार अध्ययन करनाः- “करत करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान रसरी आवत जात ते सिल पर परत निशान” इस वाक्य को तो हम बचपन से ही सुनते आ रहे हैं और अगर हम इसका अर्थ सही समझ लेते हैं तो सारी परेशानी का हल तुरंत हो सकता है इसका अर्थ है जैसे कुए पर रखी हुई रस्सी बार-बार ऊपर नीचे होने से पत्थर पर निशान पड़ जाते हैं उसी तरह बार-बार प्रयास करने से मंदबुद्धि भी विद्वान हो जाता है।

इस वाक्य में ही सफलता का राज छुपा हुआ है क्योंकि एक विद्यार्थी अध्ययन तो करता है परंतु उस अध्ययन का फल हमें तब मिलता है जब हम उस अध्ययन को लगातार करते रहे। 24 घंटे में से 18 घंटे अध्ययन करना महत्वपूर्ण नहीं है परंतु दिन में और प्रत्येक दिन बेशक थोड़ा-थोड़ा परंतु लगातार अध्ययन करना अधिक फलदायक होता है। बेशक दिन में आप 6 घंटे ही अध्ययन करें और इस रूटीन को आप प्रत्येक दिन अपनाएं।

5. पढ़े हुए का लगातार रिवीजन:- हमारा दिमाग जितना छोटा है, इसके राज उतने ही गहरे हैं। दुनियाभर के वैज्ञानिक दशकों से इसके राज खोलने में जुटे हुए हैं, फिर भी दिमाग की सभी परतें खुल नहीं पाई हैं। माना जाता है कि हमारा दिमाग इतना सक्षम है कि सुपर कम्प्यूटर भी उसके आगे कुछ नहीं। बावजूद इसके, हम इंसान अपने दिमाग का सही और पूरा उपयोग करना सीख ही नहीं पाए हैं। हमारा दिमाग कई चीजों को अधिक दिनों तक याद नहीं रख सकता इसलिए जरूरी है कि विद्यार्थी को जो भी अध्ययन किया जा रहा है उसे बार-बार रिवाइज करें ताकि वह लंबे समय तक हमारे दिमाग में बस सके।

What is inflation? Causes & Types of inflation?

Inflation:-

Inflation types & causes

In economics, inflation (or less frequently, price inflation) is a general rise in the price level of an economy over a period of time.  When the general price level rises, each unit of currency buys fewer goods and services;  Consequently, inflation increases a reduction in the purchasing power per unit of the money.

Cause of inflation:-

Cost push:- When the inputs of production become expensive such as land, salary, labor, it affects inflation and the product produced starts to become expensive.

Demand pull:- Demand and supply gap increases due to which inflation arises.

Factor affecting Demand:-

– Increase in money supply:- When people have more amount of money then it increases inflation because people have more money and do not buy more, which generates more demand which leads to inflation.

Increase in residual income:- Increase in this increases the expenditure on household goods.

Cheap currency policy:- By adopting cheap currency policy, the interest rate is kept low due to which people take more and more loans and people get more money and they use that money in shopping which creates demand in the economy.  it occurs.

Increasing public spending:- This leads to a deficit budget so that the money reaches people and demand is created again in the economy.

Lending back to the people, this brings money to the people and demand is generated in the economy so that inflation can be dealt with.

Factor Affecting Supply:-

– Lack of production factors: – This increases the cost of production and causes inflation.

– Industrial fights

– natural disasters

– Increase in exports: – This reduces domestic demand

– International factors such as increase in the price of oil

Types of Inflation:-

1. Creeping / low inflation- Here inflation is between 0% – 3% which is both important and safe for economic prosperity.

2. Walking & trotting inflation- Now inflation has increased from 3% to 7% which is a concern for any economy and the government looks for ways to reduce it.

3. Rapid inflation- here there is a rapid price rise, inflation increases from 10% to 20%.

4. Hyperinflation / Runaway / Galloping inflation- Here inflation is at its highest level which is more than 20%.

Influence of inflation:-

Loss to the debtor – The person who has borrowed at the time of inflation has a loss.

Benefit to the creditor – The person who lends at the time of inflation benefits.

Benefit to the producer – At the time of inflation, the quantity of the commodity is less and its mother is more, which increases the value of that commodity, it benefits the producers.

Loss to consumers – During inflation, people have to pay a higher price while buying the goods, which causes it to lose.

Benefits to bond issuers

Loss to bond holders

Profit to Equity Holder

Effect on production and consumption:-

– Due to the high price, the demand will be reduced, the quantity of its production will also decrease.

– Producers will decrease quality and quantity to maintain the same value

– Both production and consumption will suffer

Other effects:-

– If the balance of payment value decreases, then the export will increase and if the price falls, the import will increase.

– Exchange rate exports less imports, this will increase demand for foreign currency and depreciation of domestic currency.

Control over inflation:-

On demand side:-

– To control the money supply, the monetary measures adopted by the RBI to reduce the money if the money supply in the market is high and if there is a shortage of money in the market then increase the money supply, thereby controlling inflation  is done.

– Determining the price of a product

– Demonetisation of currency which will cause shortage of funds

– Issue of new currency which will reduce the value of old currency

Fiscal Measures:-

– Reduce unnecessary expenditure

– Increase in direct taxes

– Reduction in indirect taxes

– Reduction in government expenditure, especially revenue

– Increase in loan interest rates

Other terminology related to inflation: –

1. Deflation (contraction): – It is also called negative inflation in which the value keeps falling continuously.

2. Disinflation:- Inflation falls as if inflation increases but it reduces the rate of inflation.

3. Inflationary Gap:- Government spending above national income is also known as Fiscal Deficit.  As the income is ₹ 100 and expenses are ₹ 120, then we have to take ₹ 20 from other sources which leads to Fiscal deficit.

4. Deflationary Gap:- National income is high and the total expenditure of the government decreases, it is also called fiscal surplus.  (Income ₹ 100 and expenses ₹ 88)

5. Inflation Spiral:- The salary increases the price and the price increases the salary. If the salary increases then the income tax falls in the tax basket, after that, after paying tax, we will spend the same as what we used to do earlier.

6. Reflation:- In order to reduce unemployment, the situation created by the government to increase demand to go to higher level of economic development.  The government which takes other steps by deflation is called reflation to raise demand.

7. Stagflation:- When high inflation and high unemployment arise in the economy, it is called stagflation.

8. Skewflation:- When inflation comes in some category of goods and services in the economy, it is called Skewflation.

9. Bottleneck Inflation:- If there is a huge drop in supply in the economy and demand remains the same, then the problem of Bottleneck inflation arises.

10. Structural inflation:- It occurs widely in developing countries.  Causes of structural defects: –

– such as supply interruption

– Now lack of infrastructure

– Keeping MSP stable and variable price for some crops under MSP

– Problems such as hoarding etc. arising from the AMPC Act in the state.

11. Deflatory GDP:- The ratio between GDP at constant prices and GDP at current prices is called GDP deflator. This ratio arises due to inflation.

12. Filiph curve:- Relationship B/W inflation and unimployment.

Difference between core inflation and headline inflation:-

1. Core Inflation:-

All the objects are counted in it.

Except Food and Fuel.  Because the value of these things is very variable.

The core inflation remains constant after removing these objects.

2. Headline inflation:-

After the inclusion of food and fuel it is calculated by including all the items.

This CPI remains combined.

It is highly volatile and unstable.

1. If deflation continue in the economy that called slowdown in the economy.

2. If slowdown is continue for 3 quarters then we face recession in the economy.

3. If recession continues in the economy then the economy goes in depression.

मंहगाई :- अर्थशास्त्र में, मुद्रास्फीति (या कम बार, मूल्य मुद्रास्फीति) समय की अवधि में अर्थव्यवस्था के मूल्य स्तर में सामान्य वृद्धि है।  जब सामान्य मूल्य स्तर बढ़ता है, तो मुद्रा की प्रत्येक इकाई कम सामान और सेवाएं खरीदती है;  नतीजतन, मुद्रास्फीति पैसे की प्रति यूनिट क्रय शक्ति में कमी को दर्शाती है।

महंगाई के कारण:-

Cost push:- जब उत्पादन के आगत महंगे हो जाते हैं जैसे भूमि, वेतन, लेबर, उसका प्रभाव महंगाई पर पड़ता है और जो प्रोडक्ट उत्पादित होता है वह महंगा होने लगता है।

Demand pull:- डिमांड और सप्लाई का गेप बढ़ जाता है जिससे महंगाई उत्पन्न हो जाती है

Factor affecting Demand:-

धन की आपूर्ति में वृद्धि:- जब लोगों के पास अधिक मात्रा में धन आता है तो इससे महंगाई बढ़ती है क्योंकि लोगों के पास अधिक पैसा होता है और अधिक खरीदारी नहीं करते जिससे डिमांड अधिक उत्पन्न हो जाती है जो कि महंगाई को जन्म देती है

– अवशिष्ट आय में वृद्धि:- इसमें वृद्धि होने से घरेलू वस्तु पर होने वाले खर्च में वृद्धि होती है

– सस्ती मुद्रा नीति:- सस्ती मुद्रा नीति अपनाने से ब्याज दर निम्न रखी जाती है जिससे लोग अधिक से अधिक ऋण लेते हैं और लोगों के पास अधिक पैसा पहुंच जाता है और वह उस पैसे का प्रयोग खरीदारी में करने लगते हैं जिससे डिमांड अर्थव्यवस्था में पैदा होती है।

– सार्वजनिक खर्च बढ़ाना:- इससे डिफिसिट बजट होता है ताकि लोगों के पास पैसा पहुंचे और अर्थव्यवस्था में पुनः मांग पैदा की जाए।

– लोगों का उधार वापस देना इससे लोगों के पास पैसा आ जाता है और अर्थव्यवस्था में मांग उत्पन्न की जाती है ताकि महंगाई से निपटा जा सके।

Factor Affecting Supply :-

उत्पादन के कारको की कमी होना:- इससे उत्पादन लागत बढ़ जाती है और महंगाई उत्पन्न हो जाती है

– औद्योगिक झगड़े

– प्राकृतिक आपदाएं

– निर्यात में वृद्धि :- इससे घरेलू मांग में कमी आ जाती है

– अंतरराष्ट्रीय कारक जैसे तेल के मूल्य में वृद्धि होना

Types of Inflation:-

1. Creeping/low inflation- यहां पर महंगाई 0% – 3% के बीच होती है जो कि आर्थिक समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण भी है और सुरक्षित भी है।

2. Walking & trotting inflation- अब यहां पर महंगाई बढ़ कर 3% से 7% हो चुकी है जो कि किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय है और सरकार इसे कम करने के लिए उपाय ढूंढती है।

3. Rapid inflation- यहां पर तीव्र गति से मूल्य में वृद्धि होती है 10% से 20% तक महंगाई बढ़ जाती है

4. Hyperinflation / Runaway / Galloping inflation- यहां पर महंगाई अपने उच्चतम स्तर पर होती है जो कि 20% से भी अधिक होती है

मुद्रास्फीति के प्रभाव:-

– देनदार को हानि– मुद्रास्फीति के समय जिसने उधार लिया होता है उसको हानि होती है।

– लेनदार को लाभ- मुद्रास्फीति के समय जिसने उधार दिया जाता है उसे लाभ होता है।

– उत्पादक को लाभ– मुद्रास्फीति के समय वस्तु की मात्रा कम होती है और उसकी मां अधिक होती जिससे उस वस्तु का मूल्य अधिक हो जाता है इसका लाभ उत्पादकों को होता है।

– उपभोक्ताओं को हानि– मुद्रास्फीति के समय लोगों को वस्तु को खरीदते समय ज्यादा कीमत अदा करनी होती है जिससे उसे हानि होती है।

बांड जारी करने वालों को लाभ।

बांड धारको को हानि

इक्विटी धारक को लाभ।

उत्पादन और खपत पर प्रभाव :-

-कीमत अधिक होने से मांग कम होगी उसके उत्पादन की मात्रा में भी कमी आएगी

-उत्पादक समान मूल्य बनाए रखने के लिए क्वालिटी और क्वांटिटी में कमी करेंगे

-उत्पादन और उपभोग दोनों को हानि होगी

अन्य प्रभाव:-

बैलेंस ऑफ पेमेंट मूल्य में कमी आएगी तो निर्यात बढ़ेगा और मूल्य में गिरावट आएगी तो आयात बढ़ेगा

एक्सचेंज रेट एक्सपोर्ट कम इंपोर्ट अधिक इससे विदेशी मुद्रा की डिमांड बढ़ेगी और घरेलू मुद्रा का अवमूल्यन होगा

महंगाई पर नियंत्रण:-

मांग की ओर:-

मुद्रा आपूर्ति पर नियंत्रण करना इसके लिए मौद्रिक उपाय जिसे आरबीआई (RBI) द्वारा अपनाया जाता है अगर बाजार में धन की आपूर्ति अधिक है तो मुद्रा को कम करना और अगर बाजार में धन की कमी है तो धन की आपूर्ति को बढ़ाना इससे महंगाई पर नियंत्रण आरबीआई के द्वारा किया जाता है।

– किसी प्रोडक्ट का मूल्य निश्चित करना

– मुद्रा का विमुद्रीकरण करना जिससे धन की कमी होगी

– नई मुद्रा जारी करना जिससे पुरानी मुद्रा की वैल्यू कम हो जाएगी

राजकोषीय उपाय:-

– अनावश्यक व्यय कम करना

– प्रत्यक्ष करों में वृद्धि करना

-अप्रत्यक्ष करों में कमी करना

– सरकारी व्यय में कमी करना खासकर राजस्व

– ऋण की ब्याज दरों में वृद्धि करना

महंगाई से संबंधित अन्य शब्दावली:-

1. Deflation (संकुचन):- इसे नकारात्मक इन्फ्लेशन भी कहते हैं इसमें लगातार मूल्य गिरता रहता है।

2. Disinflation:- इसमें महंगाई की दर गिरती है जैसे इसमें महंगाई तो बढ़ती है लेकिन महंगाई बढ़ने की दर कम हो जाती है

3. Inflationary Gap:- राष्ट्रीय आय से ऊपर सरकारी खर्च होना इसे Fiscal Deficit भी कहते हैं। जैसे आय ₹100 है और खर्च ₹120 कर रहे हैं तो ₹20 हमें अन्य स्त्रोत से लेने होते हैं जिससे Fiscal deficit आ जाता है।

4. Deflationary Gap:- राष्ट्रीय आय ज्यादा हो और सरकार की कुल खर्च में कमी आ जाती है इसे fiscal surplus भी कहते हैं। (आय ₹100 और खर्च ₹88)

5. Inflation Spiral:- वेतन प्राइस को बढ़ाते हैं और प्राइस वेतन को बढ़ाती है अगर वेतन बढ़ता है तो इनकम टैक्स टैक्स बास्केट में आ जाते हैं उसके बाद टैक्स देकर फिर उतना ही खर्च करेंगे जितना हम पहले क्या करते थे

6. Reflation:- बेरोजगारी कम करने के लिए गवर्नमेंट द्वारा जानबूझ कर बनाए गए हालात आर्थिक विकास के उच्च स्तर पर जाने हेतु मांग में वृद्धि करवाना। डिफ्लेशन से जो गवर्नमेंट अन्य कदम उठाती है डिमांड को ऊपर उठाने के लिए उसे रिफ्लेशन कहते हैं

7. Stagflation:- जब अर्थव्यवस्था में उच्च महंगाई और उच्च बेरोजगारी उत्पन्न हो उसे स्टैगफ्लेशन कहते हैं।

8. Skewflation:- जब अर्थव्यवस्था में वस्तुओं और सेवाओं की कुछ श्रेणी में महंगाई आ जाती है तो उसे Skewflation कहा जाता है।

9. Bottleneck Inflation:- अगर अर्थव्यवस्था में आपूर्ति में भारी गिरावट और मांग समान बनी रहे तो इससे Bottleneck inflation की समस्या उत्पन्न होती है।

10. Structural inflation (संरचनात्मक मुद्रास्फीति):- यह व्यापक रूप से विकासशील देशों में उत्पन्न होती है। संरचनात्मक दोषों के कारण:-

– जैसे आपूर्ति में रुकावट आना

– अबसंरचना की कमी

– MSP के तहत कुछ फसलों के लिए स्थिर और कुछ के लिए परिवर्तनशील मूल्य रखना

– राज्य में AMPC एक्ट से जमाखोरी इत्यादि जैसी समस्या उत्पन्न होना।

11.Deflatory GDP:- कांस्टेंट मूल्यों पर जीडीपी और वर्तमान मूल्यों पर जीडीपी के बीच का अनुपात जीडीपी डिफ्लेटर कहलाता है यह अनुपात इन्फ्लेशन के कारण पैदा होता है

12. Filiph curve:- रिलेशनशिप B/W इन्फ्लेशन एंड अनइंप्लॉयमेंट।

कोर इन्फ्लेशन और हैडलाइन इन्फ्लेशन में अंतर:-

1. कोर इन्फ्लेशन:-

इसमें सभी वस्तु की गणना की जाती है ।

Except Food and Fuel. क्योंकि इन वस्तु का मूल्य बहुत परिवर्तनशील होता है।

इन वस्तु को निकालने के पश्चात कोर इन्फ्लेशन काफी हद तक है कांस्टेंट रहता है।

2. हैडलाइन इन्फ्लेशन:-

Food and fuel को शामिल करने के पश्चात सभी वस्तुओं को शामिल करके गणना की जाती है।

यह CPI combined रहता है।

यह अत्यधिक परिवर्तन से और अस्थिर है।

What is integrated Guided missile Development Programme (IGMDP)

Missiles Technology

The Integrated Guided Missile Development Program (IGMDP) was an Indian Ministry of Defense program for the research and development of the broad range of missile.

The Integrated Guided Missile Development Program (IGMDP) was started in 1982-83 under the leadership of Dr. APJ Abdul Kalam.

The program was managed:- by the Defense Research and Development Organization (DRDO)* and Ordnance Factories Board.

The main objective of this program was to make India self-reliant in the field of missile technology.

The program ran from 1983 to 2012 under which 5 missiles were built:

1. Prithvi : – The Prithvi missile is a family of tactical surface to surface short-range ballistic missile (SRBM)

India’s first indigenously developed ballistic missile.

– Range 150-300km

2. Agni: – The Agni missile is a family of medium to intercontinental range ballistic missiles.

-Agni missiles are long range, nuclear weapons capable surface to surface ballistic missile.

Types: –

1. Agni-I, Agni-II: – Medium-range ballistic missile.  Range 700–3,500 km.

2.Agni-III, Agni-IV: – Intermediate-range ballistic missile.  Range -3,000–5,000 km

3.Agni-V, Agni VI: – Intercontinental ballistic missile.Range -5,000–12,000 km.

3. Trishul: – Trishul is the name of a short range surface to air missile.  Range -12km

This is fire and forget anti tank guided missile.  It is an all weather, top attack missile.

4. Nag: – Nag is India’s third generation missile.

Range of 3 to 7 km.

Helina: It is a helicopter system of Naga Missile System which can be launched by helicopter.

Dhruvastra: The helina that will be used by the Air Force will be called Dhruvastra.

5. Akash: – Akash is a new generation medium-range surface-to-air missile.  Range of 30-70km.

* A trick through which missiles made under IGMDP can be memorized: – PATNA

P-Prithvi

A-Agini

T-Trishul

N-Nag

A-akash

इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम (IGMDP) इन हिंदी

इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम (IGMDP) मिसाइल की व्यापक रेंज के अनुसंधान और विकास के लिए एक भारतीय रक्षा मंत्रालय का कार्यक्रम था।

1982-83 में आईजीएमडीपी डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के नेतृत्व में शुरू किया गया।

कार्यक्रम का प्रबंधन:- रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) और आयुध निर्माणी बोर्ड (OFB) द्वारा किया गया था।

प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत को विशेष रूप से तैयार करना।

1983 से 2012 तक 5 मिसाइलों का निर्माण या गया :-

1.पृथ्वी :- पृथ्वी मिसाइल सामरिक सतह से सतह कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (SRBM) का एक परिवार है।

– भारत की पहली स्वदेशी रूप से विकसित बैलिस्टिक मिसाइल।

– रेंज 150-300km

2. अग्नि:- अग्नि मिसाइल मध्यम से अंतरमहाद्वीपीय दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों का एक परिवार है।

-अग्नि मिसाइलें लंबी दूरी की, परमाणु हथियार सक्षम सतह से सतह पर मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल हैं।

प्रकार:-

1. अग्नि- I, अग्नि- II:- मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल।  रेंज 700-3,500 किमी।

2.अग्नि-III,अग्नि-IV:- इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल।  रेंज -3,000–5,000 किमी

3.अग्नि-V, अग्नि VI :- इंटरकांटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल। रेंज -5,000-12,000 किमी।

3. त्रिशूल:- त्रिशूल सतह से हवा में मार करने वाली कम दूरी की मिसाइल का नाम है।  रेंज -12 किमी

4. नाग:- नाग भारत की तीसरी पीढ़ी की मिसाइल है।

यह दागो और भूल जाओ टैंक रोधी निर्देशित मिसाइल है।  यह ऑल वेदर, टॉप अटैक मिसाइल है।

3 से 7 किमी की रेंज।

– हेलीना: यह नाग मिसाइल सिस्टम का भाग है इससे हेलीकॉप्टर से लांच किया जा सकता है

–  ध्रुव अस्त्र:- हेलीना जिसे एयरफोर्स द्वारा प्रयोग में लाया जाएगा

5. आकाश:- आकाश नई पीढ़ी की मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल है।  30-70 किमी की रेंज।

*एक ट्रिक के माध्यम से IGDMP के तहत बनी मिसाइलों को याद रखा जा सकता है:- PATNA

पी- पृथ्वी

ए- अग्नि

टी- त्रिशूल

एन- नाग

A- आकाशी

*The Defence Research and Development Organisation (DRDO) :- is an agency under the Department of Defence Research and Development in ministry of Defence.

It was formed in 1958.

HQ. New Dehli

Formed by the merger of the 4 organizations :-

Technical Development Establishment(TDE)

Directorate of Technical Development (DoTD)

Production of the Indian ordnance Factories (IOF)

Defence Science Organisation.