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What is Wetland? Ramsar convention, and which India’s wetlands included as Ramsar Sites?

रामसर कन्वेंशन के अनुसार “दलदल पंक भूमि, पीट भूमि या जल कृत्रिम या प्राकृतिक, स्थाई या अस्थाई जल, गतिमान जल, खारा या ताजा या नमीयुक्त जल क्षेत्रों को आद्र भूमि कहा जाता है।”

आद्र भूमियों को धरातल के उन क्षेत्रों के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जो स्थाई एवं अस्थाई रूप से पानी में डूबे हुए या जलमग्न हो। यह तर भूमियां धरातल पर अत्यधिक उत्पादक परिस्थितिकी तंत्र है।

आद्र भूमियों का महत्व

मानव के लिए स्वच्छ जल।

पानी के बहाव को नियंत्रित करना

बाढ़ नियंत्रण

मछली एवं भोज्य पदार्थों के उत्पादक

वनस्पति जीव एवं सूक्ष्म जीव जंतु के आश्रय स्थल

मृदा के लिए जल अवशोशक

मनोरंजन क्रीडा स्थल एवं पर्यटक स्थल

प्रदूषण को कम करना

तलछट की गंदगी को कम करना

अपशिष्ट जल उपचार

रामसर कन्वेंशन आदर भूमियों के संरक्षण के लिए 2 फरवरी 1971 को ईरान के रामसर शहर में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन हुआ इसे ही रामसर समझौता कहा जाता है।

वर्तमान में 169देशों ने इस संधि पर हस्ताक्षर किए हुए हैं यह समझौता 1975 से ही लागू है तथा भारत 1982 में इसमें शामिल हुआ

इसी के उपलक्ष पर विश्व आर्द्रभूमि दिवस 1997 से प्रतिवर्ष 2 फरवरी को मनाया जाता है।

भारत में कुल आद्र भूमि क्षेत्रफल भारत के भौगोलिक क्षेत्रफल का 4.63% है अब तक भारत के 42 क्षत्रों को रामसर समझौते के अंतर्गत आद्र भूमि क्षेत्र घोषित किया हुआ है।

केरल– 1आस्था मुड़ी आर्द्रभूमि इसमें से राष्ट्रीय राजमार्ग 3 गुजरता है।

2 वैंबनाड़ कोल वेटलैंड- 3 जिलों में फैला है 2nd बड़ी रामसर साइट & भारत की लंबी झील।

3 सस्तमकोट्टा झील

तमिल नाडु- प्वाइंट कैलिमेरे वाइल्डलाइफ एंड वर्ल्ड सेंचुरी – मैंग्रूव और ड्राई सदाबहार वन

आंध्र प्रदेश- कोलेरू झील- गोदावरी और कृष्णा नदी के बीच।

उड़ीसा- चिल्का झील- भारत की सबसे बड़ी तटीय लैगून झील।

नालबाना पक्षी अरण्य का मुख्य हिस्सा

भारत में ज्ञात इरावती डॉल्फिन प्रजाति का एकमात्र घर

.. भितरकनिका आर्द्रभूमि & गहिरमाथा मेरिन वन्यजीव अभयारण्य बीडब्ल्यूएस से सटा हुआ खारे पानी का मगरमच्छ ओलिव रिडले

महाराष्ट्र- नंदूर मद्महेश्वर गोदावरी और मधुबन नदी के संगम पर..

लोनार झील

मध्य प्रदेश- भोज आर्द्रभूमि

गुजरात- नालसरोवर बर्ड सेंचुरी भारतीय जंगली गधे की लाइफ लाइन।

वेस्ट बंगाल- ईस्ट कोलकाता वेटलैंड्स कोलकाता शहर के लिए बहुत उपयोगी।

सुंदरबन वेटलैंड- लार्जेस्ट रामसर साइट इन इंडिया।

What is persistent organic pollutants?(POPs)

Environment pollution

Persistent organic pollutants:- sometimes known as “forever chemicals” are organic compounds  that are resistant to environmental degradation  through chemical , biological , and photolytic processes.

 Because of their persistence, POPs bioaccumulate  with potential adverse impacts on human and the environmen health.

Characterstics of POPs:-

– stay in the environment for a long time

– Effects and Expansion More

Stockholm Agreement:- Lists all these POPs.

A Global Agreement.

Its main objective is to protect human and environment from POP.

This agreement was brought in 2001 and came into force from 2004.

India retified from 2006.

The Dirty Dozen:- 12 of the deadliest POPs, named “The Dirty Dozen” by the delegates.

These POPs have been grouped into three categories:

1. pesticides:- aldrin, DDT, chlordane, dieldrin, endrin, heptachlor, mirex and toxaphene.

2. industrial chemical:- POPs such as hexachlorobenzene (HCB) and polychlorinated biphenyls (PCBs) and

3. finally, POPs:- such as dioxins and furans – the by-products and contaminants produced in waste disposal processes.

स्थायी कार्बनिक प्रदूषक(POPs):- कभी-कभी “हमेशा के लिए रसायन” के रूप में जाना जाता है, ऐसे कार्बनिक यौगिक होते हैं जो रासायनिक, जैविक और फोटोलिटिक प्रक्रियाओं के माध्यम से पर्यावरण क्षरण के प्रतिरोधी होते हैं।

उनकी दृढ़ता के कारण, पीओपी मानव और पर्यावरण स्वास्थ्य पर संभावित प्रतिकूल प्रभावों के साथ जैवसंचित होते हैं

Characterstics of POPs:-

– पर्यावरण में बहुत देर तक रहते

– प्रभाव और विस्तार अधिक

स्टॉकहोम समझौता :- इन सभी पीओपी को लिस्ट करता है।

एक ग्लोबल समझौता।

इसका मुख्य उद्देश्य मानव और पर्यावरण को सुरक्षित करना है पीओपी से।

यह समझौता 2001 में लाया और 2004 से लागू हुआ

भारत ने 2006 से retify किया।

द डर्टी डोजेन: – सबसे घातक पीओपी में से 12, POPs को “द डर्टी डोजेन” नाम दिया गया।

इन पीओपी को तीन श्रेणियों में बांटा गया है:-

1. कीटनाशक:- एल्ड्रिन, डीडीटी, क्लोर्डेन, डाइलड्रिन, एंड्रिन, हेप्टाक्लोर, मायरेक्स और टोक्साफीन।

2. औद्योगिक रसायन:- पीओपी जैसे हेक्साक्लोरोबेंजीन (एचसीबी) और पॉलीक्लोराइनेटेड बाइफिनाइल (पीसीबी) और

3. अंत में, पीओपी:- जैसे डाइऑक्सिन और फ्यूरान – अपशिष्ट निपटान प्रक्रियाओं में उत्पादित उप-उत्पाद और संदूषक।